Tally accounting kya hai? / What is accounting in Hindi,

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Tally accounting kya hai? / What is accounting in Hindi,

Contents
एकाउंटिंग क्या है और उसका महत्व!एकाउंटिंग क्या है? (What is accounting in HIndi)Accounting के तीन मुख्य प्रकार What are Main Three Types of Accounting?)Personal Account (व्यक्तिगत खाता)Real Account (वास्तविक खाता)Nominal Account (नाममात्र का खाता)इन तीन accounts के अलावा कुछ और प्रकार है:Accounting के कुछ विशेष terms (Important terms used in accounting)1. Accounts Payable (AP)2. Accounts Receivable (AR)3. Accrued Expense 4. Asset (A)5. Balance Sheet (BS)6. Book Value (BV) 7. Equity (E)8. Inventory 9. Liability (L)10. Expense (Cost)11. Cost of Goods Sold12. Gross Margin (GM)13. Gross Profit (GP)14. Net Income (NI)15. Net Margin16. Revenue (Sales) (Rev)Accounting के फायदें (Benefits of accounting):एकाउंटिंग क्या है, प्रकार, एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर के फायदें और एकाउंटिंग से जुडी कुछ ख़ास बातें।हिंदी में जानें एकाउंटिंग क्या है (Accounting kya hai? / what is accounting in Hindi?)एकाउंटिंग के प्रकार (टाइप्स ऑफ़ एकाउंटिंग? / types of accounting in hindi):व्यक्तिगत खाता (Personal Account):वास्तविक खाता (Real Account)नाममात्र का खाता (Nominal Account)एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर क्या है और क्या करता है? (What is accounting software in Hindi and what does it do?)एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर अपनाने के 5 फायदें (importance of accounting in hindi)ऑफलाइन एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर और ऑनलाइन एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर में बेहतर क्या है? (What is offline accounting software and what is online accounting software?)ऑफलाइन एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर का डिसअडवानटेज या नुकसान क्या है? What is the disadvantages of offline or basic accounting softwares? 

एकाउंटिंग क्या है और उसका महत्व!

एकाउंटिंग क्या है? (What is accounting in HIndi)

Accounting ko हिंदी mein लेखांकन kaha jata है। ये process होता है जो की Financial Aspects (वित्तीय पहलुओ) को record रखता है। Accounting का process किसी भी organization या business में हो रहे financial transactions के बारे में लिखित रूप में जानकारी रखता है।

Accounting में जितना विज्ञान है उतना ही कला भी। ये पैसों के लेनदेन को रिकॉर्ड करता है, वर्गीकृत यानि क्लासिफ़ाइ करते है, और उनके सारांश तैयार करके उनको इस प्रकार प्रस्तुत करते है, जिससे उनका विश्लेषण या निर्वचन हो सके।

Accounting एक विशेष प्रमुख से संबंधित सभी लेनदेन को क्रमबद्व करता है। Account या खाता किसी भी व्यक्ति या चीज़ से संबंधित लेनदेन के सारांश रिकॉर्ड को दर्शाता है। उदाहरण स्वरूप: जब कोई एंटिटी अलग अलग suppliers और consumers के साथ लेनदेन करती है, तो प्रत्येक suppliers और consumers एक अलग खाता होगा।

खाता tangible तथा intangible किसी भी चीजों से संबंधित हो सकता है जैसे की – ज़मीन, बिल्डिंग्स, फर्नीचर, etc. किसी खाते के बाएं हाथ को डेबिट (‘डॉ’) पक्ष कहा जाता है, जबकि दाएं हाथ को क्रेडिट (‘क्र’) पक्ष कहा जाता है।

Accounting के तीन मुख्य प्रकार What are Main Three Types of Accounting?)

Accounting तीन मुख्य प्रकार हैं:

Personal Account (व्यक्तिगत खाता)

जो account किसी भी व्यक्ति, organization, company से जुड़े होते हैं उसे Personal Account कहा जाता है। उदहारण स्वरूप, मोहन नाम के किसी इंसान का वक्तिगत खाता को कहा जायेगा personal account (eg. – मोहन का खाता। Personal account के अंतर्गत निम्नलिखित खाते आते हैं:

  • किसी व्यक्ति का account
  • Bank account
  • Capital account
  • Supplier या customer account
  • Financial और institution account
  • Drawing account
  • XYZ limited account etc.

Personal account के अन्दर वैसे सभी account आ जाते हैं जिससे हमें ये पता चलता है की किससे कितना पैसा लेना है या किसको कितना पैसा देना है। Personal Account का rule:  

  1. Debit होते है receiver.
  2. Credit होते है Giver.

Real Account (वास्तविक खाता)

Real account या वास्तविक खाता वो है जो वस्तु या संपत्ति से related होते हैं। वास्तविक खता के ज़रिये assets (goods and services) और liabilities यानि ऋण या कर्जा से जुड़े जानकारी मिलती है। Real account निम्नलिखित प्रकार के होते हैं:

Tangible Real Accounts:

इनमें ऐसी संपत्तियां शामिल हैं जिनका भौतिक अस्तित्व है और जिन्हें छुआ जा सकता है। उदाहरण के लिए –

  • Land account
  • Building account
  • Machinery account
  • Furniture account
  • Vehicles account

Intangible Real Accounts:

इन परिसंपत्तियों का कोई भौतिक अस्तित्व नहीं है और इन्हें छुआ नहीं जा सकता है। हालाँकि, इन्हें पैसों के मामले में मापा जा सकता है और इनका मूल्य हो सकता है। उदाहरण के लिए – 

  • Goodwill account
  • Patent account
  • Copyright account
  • Trademark account etc.

Real Account का rule:

  1. Debit है जो व्यवसाय में आता है।
  2. Credit है जो व्यापार से बाहर चला जाता है।

Nominal Account (नाममात्र का खाता)

Nominal Account में आय (income) और खर्च (expenses) के बारे में जानकारी मिलता है। Nominal Account हमारी लाभ या हानि से जुडी information को रखता है। 

Nominal Account का rule:

  1. Debit है व्यवसाय के सभी खर्चें और नुक्सान
  2. Credit है व्यवसाय की आय और लाभ

Nominal account निम्न प्रकार के होते हैं:

  • Discount account
  • Salary account 
  • Purchase account
  • Interest account
  • Wages account
  • Commission pay or receive account
  • Sales account etc
  • Insurance account

इन तीन accounts के अलावा कुछ और प्रकार है:

  • Cash Account:

इस खाते का उपयोग नकद, निकासी और जमा द्वारा किए गए भुगतानों के रिकॉर्ड रखने के लिए किया जाता है।

  • Income Account:

इस खाते का उद्देश्य व्यवसाय के आय स्रोतों का रिकॉर्ड रखना है।

  • Expense Account:

यह खाता व्यवसाय के व्यय को ट्रैक करता है।

  • Liabilities Account:

यदि कोई ऋण या कर्ज है तो वह राशि liabilities के अंतर्गत आती है।

  • Equity Account:

यदि खाते के मालिक या सामान्य शेयरों का निवेश है, तो कमाई को बनाए रखा जाता है, फिर ये Equity के अंतर्गत आते हैं।

Accounting के कुछ विशेष terms (Important terms used in accounting)

Accounting के कुछ विशेष terms को समझना व्यापारियों के लिए ज़रूरी है जैसे के:

1. Accounts Payable (AP)

इसमें उन सभी खर्चों को शामिल किया जाता है जो एक व्यवसाय में हुआ है लेकिन अभी तक भुगतान नहीं किया है। ये Account बैलेंस शीट पर Liability के रूप में दर्ज किया जाता है क्योंकि यह company द्वारा बकाया ऋण है।

2. Accounts Receivable (AR)

इसमें एक कंपनी द्वारा प्रदान किए गए सभी बिक्री शामिल हैं, लेकिन अभी तक भुगतान एकत्र नहीं किया गया है। यह खाता एक बैलेंस शीट पर है, जिसे एक asset के रूप में दर्ज किया गया है जो आनेवाले कुछ दिनों में नकदी में परिवर्तित हो जाएगी।

3. Accrued Expense 

ऐसा व्यय जो भुगतान नहीं किया गया है, लेकिन Accrued Expense शब्द से वर्णित है।

4. Asset (A)

कंपनी के पास कुछ भी है जिसका मौद्रिक मूल्य है। ये नकदी (सबसे अधिक liquid cash) से लेकर भूमि (कम से कम liquid cash) तक liquidity के क्रम में सूचीबद्ध हैं।

5. Balance Sheet (BS)

एक financial statement जो किसी company की सभी asset, liability और equity पर report करता है। इसे एक बैलेंस शीट समीकरण द्वारा तय किया जा सकता है-

<Assets = Liabilities + Equity>.

6. Book Value (BV) 

जैसे ही किसी संपत्ति का मूल्यह्रास या मूल्य कम किया जाता है, वह मूल्य खो देता है। बुक वैल्यू एक एसेट के मूल मूल्य को दर्शाता है।

7. Equity (E)

Liabilities को हटाए जाने के बाद equity बचे मूल्य को दर्शाता है। इसकी Equation को याद करें – Assets = Liabilities + Equity। अगर आप अपने assets लेते हैं और अपनी Liabilities को घटाते हैं, तो आपको equity के साथ छोड़ दिया जाता है, जो कि company का हिस्सा है जिसका दावेदार है investors और owners।

8. Inventory 

Inventory एक ऐसी शब्द है जो company द्वारा इस्तेमाल होते है अपने खरीदी गई संपत्ति को वर्गीकृत करने के लिए और ग्राहकों को बेचने के लिए जो बिना बिके रह जाते हैं। ये आइटम ग्राहकों को बेचे जाते ही इन्वेंट्री अकाउंट कम हो जाएगा।

9. Liability (L)

कंपनी द्वारा अभी तक भुगतान किए गए सभी ऋणों को liabilities के रूप में संदर्भित किया जाता है। Common liabilities में Payable, Payroll, and Loans शामिल हैं।

10. Expense (Cost)

व्यापार द्वारा की गई कोई भी लागत Expense है।

11. Cost of Goods Sold

माल की उत्पाद या सेवा से जुडी खर्चों को कॉस्ट ऑफ़ गुड्स सोल्ड कहा जाता है। इस श्रेणी में शामिल नहीं वे लागतें हैं जिन्हें व्यवसाय चलाने के लिए आवश्यक है।

12. Gross Margin (GM)

Gross profit लेने और उसी अवधि के लिए Revenue द्वारा विभाजित करके गणना की गई एक percentage को Gross Margin कहा जाता है। ये गुड्स सोल्ड की लागत में कटौती के बाद एक कंपनी की profitability दिखाता है।

13. Gross Profit (GP)

Gross Profit एक कंपनी की profitability को इंगित करता है, बिना overhead खर्चों को ध्यान में रखे। ये उसी अवधि के लिए Cost of Goods Sold की लागत को घटाकर गणना की जाती है।

14. Net Income (NI)

Net Income एक ऐसी amount है जो profit से कमाया गया ho। ye calculated किया जाता है Revenue से us प्रावधान तक के sare Expenses जैसे के COGS, Overhead, Depreciation, and Taxes आदि को subtract करके।

15. Net Margin

Net Margin वो राशि है जो किसी company के revenue से related लाभ को दर्शाती है। इसकी calculation नेट आय लेने और एक निश्चित अवधि के लिए revenue से divide करके की जाती है।

16. Revenue (Sales) (Rev)

Revenue व्यवसाय द्वारा अर्जित कोई भी धन है।

Accounting के फायदें (Benefits of accounting):

1. व्यक्ति द्वारा सभी बातों को स्मरण रखना मुश्किल है और इससे गलतियां होने की संभानाएं भी बढ़ जाते है। व्यापार में रोज़ाना हज़ारों सैकड़ों लेन-देन होते हैं, कईं चीज़ों का सौदा होता है। ये नकद और उधार दोनों हो सकते हैं। मजदूरी, वेतन, कमीशन, etc. रूप में भुगतान होते हैं। इन सभी को याद रखना संभव नहीं  है। Accounting इस आभाव को दूर करता है।

2. Accounting business से जुडी बहुत सारि खबरें हम तक आसानी से पहुँचता है जैसे के:

  • Profit और loss की जानकारी
  • उधार-बाकि की जानकारी
  • assets तथा loan की जानकारी
  • business के turnover, economic conditions etc. की जानकारी

3. पैसों के लेनदेन प्रक्रिया में दूसरी व्यापारियों से पेमेंट से जुडी समस्या आने पर लेखांकन अभिलेखों को न्यायालय में प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।

4. कर्मचारियों के salary, bonus, भत्ते, etc से संबंधित समस्याओं के calculation में मदद मिलती है

एकाउंटिंग क्या है, प्रकार, एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर के फायदें और एकाउंटिंग से जुडी कुछ ख़ास बातें।

NTRO: पहले लोग इन सभी चीजों को मैन्युअली मैनेज करते थें जिससे गलतिया होने के वजह से सिस्टम लॉस होने का खतरा रहता था यानि अकाउंट काम आना या हिसाब में गलतिया होन। पेपर मेंटनेंस के वजह से होने वाली सिस्टम लॉस को एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर के आने के बाद कम कर दिया है। हर कोई अब अपने अपने छोटे से बड़ा हर व्यापार में एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर उसे करना शुरू कर दियें है।

एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर सोलूशन्स कई तरह से व्यवसायों की सहायता कर सकते हैं, और आज हम आपको ठोस कारण बताएंगे कि आपको अपने व्यवसाय को बढ़ने के लिए इसका उपयोग क्यों और कैसे शुरू करना चाहिए। पहले समझना ज़रूरी है के एकाउंटिंग क्या है (व्हाट इस एकाउंटिंग?)

हिंदी में जानें एकाउंटिंग क्या है (Accounting kya hai? / what is accounting in Hindi?)

बिज़नेस की फिनांसियल सिस्टम को मैनेज करने की प्रक्रिया को एकाउंटिंग/ खाता (accounting in hindi) कहा जाता है। फाइनेंसियल सिस्टम में लेनदेन की राशि से जुडी जानकारियां,ऑडिटिंग और सभी प्रकार की फिनांसियल रिपोर्टों आदि को संभालना मुश्किल तो होते ही है। साथ ही ये हिसाब किताब बहुत ही जटिल होते हैं जिसमे समय की अनावश्यक नुक़सान होजाते है। 

एकाउंटिंग के प्रकार (टाइप्स ऑफ़ एकाउंटिंग? / types of accounting in hindi):

एकाउंटिंग के तीन मुख्य प्रकार होते हैं:

व्यक्तिगत खाता (Personal Account):

किसी भी व्यक्ति, आर्गेनाइजेशन या कंपनी से जुड़े account को पर्सनल अकाउंट या व्यक्तिगत खाता कहा जाता है।

वास्तविक खाता (Real Account)

जो वस्तु या संपत्ति से रिलेटेड होते हैं उसे Real account या वास्तविक खाता कहते है।

Real account दो प्रकार के होते हैं:

  • Tangible रियल अकाउंटस: जो सम्पत्तियों का भौतिक अस्तित्व है और जिन्हें छुआ जा सकता है
  • Intangible रियल अकाउंटस: जिन परिसंपत्तियों का कोई भौतिक अस्तित्व नहीं है और इन्हें छुआ नहीं जा सकता है। हालाँकि, इन्हें पैसों के मामले में मापा जा सकता है और इनका मूल्य हो सकता है। 

रियल अकाउंट का rule:

  • Debit वो है जो व्यवसाय में आता है 
  • Credit वो है जो व्यापार से खर्चा होते है

नाममात्र का खाता (Nominal Account)

नॉमिनल अकाउंट में आय और व्यय के बारे में जानकारी मिलता है जो हमारी लाभ और हानि से जुडी जानकारी को मैनेज करता है। 

Nominal account कईं प्रकार के होते हैं जैसे के Discount अकाउंट, Salary अकाउंट, Purchase अकाउंट, Interest अकाउंट, ages अकाउंट, Commission pay or receive अकाउंट, Sales अकाउंट, Insurance अकाउंट etc

Nominal Account का rule:

  • Debit है बिज़नेस में सभी खर्चें और नुक्सान
  • Credit है बिज़नेस की आय और लाभ

इसके अलावा कुछ और प्रकार है जैसे Cash अकाउंट, Income अकाउंट, Expense अकाउंट, Liabilities अकाउंट और Equity अकाउं।

एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर क्या है और क्या करता है? (What is accounting software in Hindi and what does it do?)

एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर एक application software है जो वो सब कुछ करता है जो एकाउंटिंग बिज़नेस में ज़रूरत है लेकिन डिजिटल तरीके से करता है। लेखांकन सॉफ्टवेयर मूल्यांकन करता है और एक व्यवसाय की वित्तीय स्थिति का ख्याल रखता है। 

ये सॉफ्टवेयर एक एकाउंटिंग इनफार्मेशन सिस्टम के तरह आपके बिज़नेस से जुडी कुछ ज़रूरी हिसाब और दस्तावेजों के देखरेख करता है:

  • आपके accounts/खाते: खातों की देखभाल करना एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर का प्रमुख कार्य है। ये देय खातों (accounts payable) और प्राप्तियों (accounts receivable) का ध्यान रखता है, बैंकिंग से जुडी कार्य में आपकी सहायता करता है, आपको एक निश्चित समय सीमा पर सभी व्यय (expenditure), आय (revenue), ऋण (liabilities), और संपत्ति (assets) दिखाता है।

  • चालान और Bill: बिल और चालान एक business का एक अन्य प्रमुख financial हिस्सा है। accounting software आपको ग्राहकों को चालान प्रदान करने और उनके लिए बिल तैयार करने में मदद करता है।
  • ट्रैकिंग सेल्स: चालान और बिल के साथ, सिस्टम कुल बिक्री को ट्रैक करता है।

  • पेरोल मैनेजमेंट: एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर कर्मचारियों को भी मैनेज करता है। ये उनके वेतन, मजदूरी, बोनस और हर वित्तीय मुआवजे का ख्याल रखता है।
  • इन्वेंटरी मैनेजमेंट: इन्वेंटरी प्रबंधन business के लिए बहुत आवश्यक है। इस समाधान को लागू करने से स्टॉक प्रबंधन की स्थिति और भी बेहतर हो जाती है।
  • रिपोर्टिंग TAX: वित्त पर समग्र रिपोर्ट बनाने के अलावा ये कर प्रबंधन का ध्यान रखता है।
  • बजट में मदद करना: ये दस्तावेजों को हाथ में लेकर विश्लेषण करता है और पिछले लोगों से तुलना करता है और नए बजट बनाने में मदद करता है।

एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर अपनाने के 5 फायदें (importance of accounting in hindi)

एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर आपके बिज़नेस के कहते का रोज़ मर्रा के हिसाबों को आसान बनके बहुत फायदे करते हैं जैसे:

  1. एक अच्छी एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर सिस्टम मैनुअल बुककीपिंग की तुलना में बहुत ज़्यादा समय बचता है।
  2. मैन्युअल लेखा गणना में त्रुटियों की संभावना बढ़ जाती है। एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर गलतियों को कम करता है।
  3. लीडिंग अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर सिस्टम उन्नत सुविधाएँ प्रदान करता है जैसे कि बिक्री योग्य डेटाबेस और सोफिस्टिकेटेड कास्टोमाइजेशन।  स्टार्टअप और छोटे बिज़नेस के विस्तार के साथ साथ अपनी बढ़ती जरूरतों और मांगों को पूरा करने के लिए एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर बहुत ही लाभदायी है। 
  4. कंप्यूटराइज्ड सलूशन जैसे के ये सॉफ्टवेयर बहुत ही इजी तो लर्न होते हैं, बहुत ज़्यादा समय इसको सिखने में नहीं जाता है। इससे आप डिजिटल इनवॉइस बना सकते हैं, अपने ज़रूरतों के हिसाब से कॅश फ्लो मैनेज कर सकते है यहाँ तक के अपने सरे इन्वेंटरी का हिसाब बोहोत ही आसानी से रख सकते है।
  5. अकौंटिंग प्लेटफ़ॉर्म उन कर राशि की गणना कर सकते हैं जिन्हें प्रत्येक चालान पर भुगतान करने की आवश्यकता होती है। इससे टैक्स रिपोर्ट करने में आसानी होती है। 

कैसे चुनें अपने कंपनी के लिए एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर? (How to choose accounting software for your business?)

तेज़ी से बदलते हुए समय के साथ, कईं समाधान बाजार में आ रहे हैं। सभी एकाउंटिंग (accounting hindi) सॉफ्टवेयर्स के अपने-अपने फायदे और नुकसान हैं। इसलिए अपने कंपनी के लिए किसी भी सॉफ्टवेयर सिस्टम को चुनते समय, खोज बिन करने और एक बेहतर निर्णय लेने के लिए बहुत आवश्यक है के जानें के ऑनलाइन या ऑफलाइन – कौनसी एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर है आपके लिए उपयोग।

ऑफलाइन एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर और ऑनलाइन एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर में बेहतर क्या है? (What is offline accounting software and what is online accounting software?)

टेक्नोलॉजी के आधार पर एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर दो प्रकार (types of accounting in hindi) के हैं:

ऑफलाइन: एक ट्रेडिशनल PC आधारित तकनीक, CD से इनस्टॉल किया जा सके ऐस,

ऑनलाइन: विकसित तकनीक, क्लाउड तथा इंटरनेट आधारित, जिसमे ऑनलाइन एक्सेस मिले कभी भी, कहीं भी।

ऑफलाइन सॉफ्टवेयर्स को एक डिफ़ॉल्ट के साथ सेट किया जाता है और अगर उन्हें बदलना पड़ता है तो पूरे कॉन्फ़िगरेशन को बदलना पड़ता है, जो की फ्लेक्सिबिलिटी में कमी लाती है। ओफ्फिलिने और क्लाउड बेस्ड एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर क्या हैं बेहतर जानने के लिए हमें और गभीराई से ऑनलाइन और ऑफलाइन एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर को समझना चाहि।  

ऑफलाइन एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर का डिसअडवानटेज या नुकसान क्या है? What is the disadvantages of offline or basic accounting softwares? 

ये रहा 8 डिसअडवानटेज या नुकसान जो आपको बेहतर निर्णय लेने में मदद कर सकते हैं:

  1. एक ऑफ़लाइन एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर या एक ईआरपी प्रणाली की इंस्टालेशन का शुल्क महंगा है। और ईआरपी सलाहकार बहुत महंगे हैं और बजट का 60% तक लेते हैं।
  2. ऐसे सॉफ्टवेयर पे एकाउंटिंग के लिए आपके कंपनी के पास ऐसे कर्मचारी होना ज़रूरी है जो सॉफ्टवेयर से अच्छी तरह से वाकिफ है।  अगर ऐसा नहीं है तो ये एक विफलता हो सकती है या कौशल प्राप्त करने में कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने के लिए लागत में इजाफा हो सकता है।
  3. ऐसे ऑफलाइन और ट्रेडिशनल सॉफ्टवेयर से काम करने के लिए अगर विभिन्न विभागों के कर्मचारी अपने विभाग की जानकारी किसी और विभाग से शेयर करने के बारे में आशंकित होते है और ऐसे जानकारी पूरी नहीं हो पाती ह।  

  1. GST के नियमों में कोई भी बदलाव होने पर हर बार डाउनलोड करने की आवश्यकता है
  2. ऐसे सॉफ्टवर्स में POS और अकाउंटिंग लिंक नहीं किया गया है। 
  3. बिक्री प्रबंधन (CRM चालान आदि) लिंक नहीं किए गए हैं।  
  4. Basic ऑफलाइन एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर (basic accounting in hindi) में डेटा खोने का जोखिम रहता हैं क्यों की कंप्यूटर में डेटा बिना किसी बैकअप के सहेजा जाता है, अगर संयोग से PC में कोई परेशानी होने या PC विफल हो जाता है तो डेटा खो जाएगा।
  5. पासवर्ड अगर एक बार सेट किया गया है और अगर आप इसे खो देते हैं, तो डेटा खोने की संभावना अधिक है। और अगर एक बार डेटा खो जाता है तो आप इसे पुनः प्राप्त नहीं कर पाएंगे। (क्लाउड बेस्ड एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर में डेटा क्लाउड में सेव्ड रहता है। 
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