Baccho Ki Kahaniya | बच्चों की कहानियां | Hindi Stories For

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Baccho Ki Kahaniya | बच्चों की कहानियां | Hindi Stories For Kids

Baccho Ki Kahaniya | बच्चों की कहानियां | Hindi Stories For Kids

1. साधु की पुत्री ( Story for Kids in Hindi )

गंगा नदी के किनारे एक साधु रहते थे। वे न केवल विद्वान थे बल्कि उनके पास जादुई शक्तियाँ भी थीं।

एक दिन वे ध्यान में मग्न थे, तभी बाज की चोंच से एक चुहिया छूट कर उनके हाथों में आ गिरी। उसकी छोटी-सी पूँछ व काली चमकीली आँखें थीं। उन्हें वह बहुत अच्छी लगी पर घर ले जाने से पहले उन्होंने जादुई मंत्रों के प्रयोग से उसे एक लड़की में बदल दिया।

वे उस लड़की को घर ले जाकर पत्नी से बोले- “तुम हमेशा से संतान चाहती थीं न, तो लो आज से यही हमारी पुत्री है, इसे पूरी देखभाल व स्नेह से पालो।

साधु की पत्नी भी अपनी पुत्री को देख प्रसन्न हो उठी। वह उसे राजकुमारी की तरह पालने लगी। साल बीतते गए, नन्ही लड़की एक सुंदर युवती बन गई। जब वह अठारह वर्ष की हुई, तो साधु व उसकी पत्नी उसके लिए वर तलाशने लगे।

साधु ने कहा- “मेरी बिटिया का विवाह ऐसे व्यक्ति से होना चाहिए, जो सबसे बड़ा हो। मेरे हिसाब से सूर्य ठीक रहेगा।” पत्नी ने भी हामी भरी। उन्होंने जादुई मंत्रों के प्रयोग से सूर्य को नीचे बुला लिया। उन्होंने उसे अपनी पुत्री से विवाह करने को कहा।

पर पुत्री ने पहले ही न कर दी। वह बोली- ” पिताजी! यह तो बहुत गरम है। मैं उससे विवाह करूँगी, जो इससे भी बेहतर हो।”

साधु निराश हो गए। उन्होंने सूर्य से कहा कि वे ही कोई वर सुझाएँ। सूर्य ने कहा- “बादलों के देवता से बड़ा कौन होगा, उनमें तो मेरी किरणों को भी रोकने की शक्ति है।”

साधु ने बादलों को नीचे बुलाया व अपनी पुत्री से विवाह करने को कहा, पर इस बार फिर पुत्री ने मना कर दिया व बोली- “ये तो कितना बदसूरत है, मैं इससे विवाह नहीं कर सकती।” साधु ने बादल देवता से कहा कि वही कोई अच्छा वर सुझा दें। वे बोले- “पवन देवता ठीक रहेंगे, वे तो मुझे भी अपने फूंक से उड़ा देते हैं।”

साधु ने पवन देवता को बुला कर अपनी पुत्री से विवाह करने को कहा। पुत्री ने फिर इंकार कर दिया व बोली- “मैं इससे शादी नहीं करूँगी। ये तो कहीं टिकते नहीं, हमेशा यहाँ-वहाँ भागते रहते हैं।” साधु ने पवन देव से पूछा- “क्या मेरी पुत्री के लिए ऐसा वर हो सकता है, जो आपसे भी बेहतर हो?”

पवन देव ने कहा कि “पर्वत देव मजबूत व ऊँचे हैं, वे मेरा भी रास्ता रोक देते हैं।”

साधु ने पर्वत देवता से कहा कि वह उसकी पुत्री से विवाह कर लें। पुत्री ने फिर से मना कर दिया व बोली- “ये तो बहुत लंबे, सख्त व कठोर हैं, मैं इनसे विवाह नहीं कर सकती, इनसे भी कोई बेहतर चाहिए।”

पर्वत देवता ने चूहे का नाम सुझाया। वे बोले-“माना मैं काफी सख्त, मजबूत व ऊँचा हूँ, पर चूहे मुझमें भी आसानी से बिल बना सकते हैं।”

साधु ने चूहे को बुलाया, उसे देखते ही उसकी पुत्री खुशी से उछल पड़ी- “हाँ पिताजी! यही तो है वह, मैं जिससे शादी करना चाहती थी!”

साधु ने सोचा- इसे ही किस्मत कहते हैं। यह एक चुहिया थी और एक चूहे से विवाह करना ही इसके भाग्य में लिखा है। उन्होंने जादुई मंत्रों के प्रभाव से पुत्री को फिर से चुहिया बना दिया।

चूहा व चुहिया विवाह करके खुशी-खुशी रहने लगे।

शिक्षाः- कोई भी अपने मूल स्वभाव को नहीं बदल सकता।

2. चार मित्र व शिकारी ( Story for Kids in Hindi )

बहुत समय पहले की बात है। जंगल में चार मित्र रहते थे। उन चारों का स्वभाव काफी अलग थाए किंतु वे पक्के दोस्त थे और किसी एक की मुश्किल में सभी मिलकर मदद करते थे। वे चार मित्र थे- चूहा, कौआ, हिरण व कछुआ।

एक दिन चूहाए कौआ व हिरण पेड़ के नीचे गप्पें मार रहे थे। अचानक चीखने की आवाज सुनाई दी। यह तो उनके मित्र कछुए की आवाज थी। वह शिकारी के जाल में फँस गया था। हिरण ने कहा- ‘अरे! अब हम क्या करेंगेघ्ष्
चूहे ने कहा- ष्चिंता मत करोए मेरे पास एक योजना है।ष् सारे दोस्तों ने मिल कर सब तय कर लिया।

हिरण शिकारी के रास्ते की ओर भागा और उसके देखते ही देखते यूँ गिर गया मानो मर चुका हो। इसी दौरान कौआ वहाँ पहुँचा और हिरण का माँस नोंचने का दिखावा करने लगा। शिकारी जाल उठा कर घर की तरफ चलाए तो उसकी नजर जमीन पर पड़े उस हिरण और कौवे पर पड़ी।
वह मृत हिरण को देख झूम उठाष्वाह! यहाँ तो हिरण मरा पड़ा है। इसका स्वादिष्ट माँस तो कई दिनों के लिए काफी होगा।

वह कछुए वाला जाल नीचे रख कर हिरण के पास गया। तभी झाड़ियों के पीछे छिपे चूहे ने आकर जाल कुतर दिया व कछुए को आजाद कर दिया। वह धीरे-धीरे चल कर झाड़ियों के पीछे छिप गया।

कौए ने कछुए को आजाद देखा तो जोर से काँव-काँव करके उड़ गयाए हिरण भी उठ कर तेजी से दौड़ा। शिकारी उसे भागता देख सन्न रह गया। वह मन मसोसते हुए कछुए के पास लौटाए तो वहाँ कुतरे जाल के सिवा कुछ नहीं था। कछुआ भी गायब था। उसने सोचा-काश! मैंने इतना लालच न किया होता।

चारों दोस्त अपनी योजना की सफलता से बेहद खुश थे। उनकी योजना ने सभी मित्रों की जान बचा ली थी। उन्होंने कसम खाई कि वे भविष्य में भी वैसे ही एक हो कर रहेंगे।

कौओं की चिंता-हितोपदेश की प्रेरक कहानियां

बहुत समय पहले की बात हैए छोटे से गाँव के बाहरए बरगद का विशाल पेड़ था। पेड़ पर नर व मादा कौआए अपने बच्चों के साथ रहते थे। कुछ दिन बाद वहाँ एक साँप खोखल में घर बना कर रहने लगा।

जब कौए भोजन की तलाश में निकल जाते, तो साँप उनके घोंसले में से अंडों से निकले छोटे-छोटे बच्चे खा लेता। ऐसा दो बार हुआ। कौओं को बहुत दुख हुआ। मादा कौए ने कहा- हमें यह जगह छोड़ देनी चाहिए क्योंकि जब तक यह साँप यहाँ रहेगा, हमारे बच्चों को जीवित नहीं रहने देगा।

नर कौए को भी बहुत बुरा लग रहा था, पर उसे साँप से लड़ने का कोई उपाय नहीं दिख रहा था। आखिर में उन्होंने अपने बुद्धिमान मित्र गीदड़ की सलाह लेने की सोची।

वे गीदड़ के पास गए और सारी परेशानी बताई। गीदड़ बोलाष्चिंता करके साँप से छुटकारा नहीं मिल सकता। शत्रु को खत्म करने के लिए अपना दिमाग लगाओ।ष् चतुर गीदड़ ने पल-भर सोचा और फिर उनके शत्रु को खत्म करने की शानदार योजना बता दी।

अगली सुबह कौआ व कौव्वी उड़ते-उड़ते नदी किनारे पहुँचे जहाँ रानी अपनी दासियों के साथ प्रतिदिन स्नान करने आती थी। वे अपने कपड़े तथा गहने उतार कर पानी में उतरी। कुछ ही दूरी पर खड़े दरबान सामान की देख-रेख कर रहे थे। कौव्वी ने रानी का हार उठाया व उड़ गई।

कौआ उसके पीछे जोर-जोर से काँव-काँव करता उड़ा ताकि दरबानों का ध्यान उस तरफ चला
दरबानों ने उन्हें हार ले जाते देखाए तो तलवारें तथा भाले चमकाते पीछे भागे। जल्द ही वे बरगद के पेड़ के पास पहुँ उन्होंने देखा कि कौए ने हार को साँप के बिल में फेंक दिया।

उन्होंने एक लंबी लाठी की मदद से हार निकालने की कोशिश की। साँप चिढ़ गया व फुकारता हुआ बाहर निकला। दरबान डर गए व उसे लाठी से पीट-पीट कर मार दिया। फिर वे हार ले कर चले गए।

कौआ व कौव्वी साँप को मरा देख बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने चतुर गीदड़ को अपनी मदद के लिए धन्यवाद दिया। इसके बाद वे अपने बच्चों के साथए बरगद के पेड़ पर खुशी-खुशी रहने लगे।

शिक्षाः-चिंता से किसी भी समस्या का हल नहीं निकलता।

4. चतुर खरगोश (Hindi mortal Story)

बहुत समय पहले एक निर्दयी शेर जंगल का राजा था वह अपने भोजन के लिए कई जानवरों को मार देता। जंगल के सभी जानवर भयभीत रहते।

एक दिन सभी जानवर उसके पास एक सुझाव लेकर गए। उनमें से सबसे चालाक लोमड़ी ने प्यार से कहा- महाराज! आप हमारे राजा हैं। हम आपके सेवक हैं। हमारा एक सुझाव है। आप बूढ़े और कमजोर हो रहे हैंए तो आप घर पर क्यों नहीं रहते।

हम वादा करते हैं कि एक जानवर रोज़ आपका भोजन बनने के लिए पहुंच जाएगा। अब आपको और शिकार नहीं करना पड़ेगा। हम भी चैन से रहेंगे।

शेर को सुझाव पसंद आ गया। वह गरजा-अगर तुम जानवर नहीं भेज सके तो मेरी जितनी मर्जी होगीए उतने जानवर मारूँगा। जानवरों ने कहा – महाराज! हम अपना वचन निभाएंगे। उस दिन से हर रोज़ एक जानवर शेर की गुफा में जाता व शेर उसे खा लेता।

एक दिन खरगोशों की बारी थीए एक छोटे खरगोश को जाने के लिए कहा गया। वह बहुत चतुर था। उसे यह बिल्कुल पसंद नहीं था कि शेर सबको मार कर खाता रहे। गुफा की ओर जाते समय उसने बचने का उपाय खोज ही लिया। वह वहाँ धीरे-धीरे चलते हुए काफी देर से पहुँचा।

शेर गुस्से में था खाने के लिए छोटा सा खरगोश देखते ही उसका गुस्सा और भड़क गया। वह गरजा- ‘तुम्हें किसने भेजा तुम मेरे खाने के लिए काफी छोटे हो और देर से भी आए हो। मैं बहुत भूखा हूँ।

नन्हें खरगोश ने सलाम ठोंका-‘महाराज! कृपयाए मेरी बात सुनें। मेरे साथ पाँच और खरगोश भेजे गए थे पर रास्ते में एक शेर मिलाए उसने उन्हें खा लिया। उसने कहा कि वह जंगल का राजा है। मैं किसी तरह बच कर निकल आया। ‘दूसरा शेर!!! कहाँ है वह दूसरा, शेर दहाड़ा।

खरगोश शेर को जंगल में बने कुएँ के पास ले गया। ष्वहाँ हैण्ण्ण्ण्उस किले में रहता है। आपको इस तरफ आता देखए छिप गया!ष् खरगोश ने एक कुएँ की ओर इशारा किया।

खरगोश ने शेर को नीचे की ओर देखने को कहा। शेर ने पानी में देखा तो उसे अपनी परछाईं दिखी। वह गुस्से से दहाड़ा। कुएँ से और भी जोर से दहाड़ने की आवाज़ आई। अपनी ही दहाड़ की गूंज सुन कर शेर को लगा कि दूसरा शेर दहाड़ रहा है। वह दुश्मन को मारने के लिए कुएँ में कूद गया। वह कुएँ में डूब गया।

और बाहर नहीं निकल सका। चतुर खरगोश खुशी-खुशी घर लौट गया। उसने अपनी हिम्मत और चतुराई से जानवरों की जान बचा ली थी।

शिक्षा :- बल से बुद्धि श्रेष्ठ है।

5 – जादुई जंगल की चमत्कारी कहानी

जादुई जंगल:- बहुत समय पहले, एक छोटा गांव था। इस गांव में एक बच्चा रहता था जिसका नाम रोहन था। रोहन को जंगलों से बहुत प्यार था। उसे अपने दिन का अधिकांश समय जंगल में बिताना अच्छा लगता था। वह हर बार जादुई जंगल के जानवरों को देखने को उत्साहित हो जाता था।

एक दिन, रोहन जंगल में एक नया रास्ता खोजने के लिए निकल पड़ा। यह रास्ता उसे बहुत आकर्षित कर रहा था क्योंकि उसने कभी पहले उस तरह का रास्ता देखा नहीं था। रोहन उत्साहित होकर उस रास्ते पर चलने लगा। धीरे-धीरे, रास्ता उसे एक अद्भुत जंगल में ले गया। वह जंगल रोहन ने कभी नहीं देखा था।

यह जादुई जंगल था। हर पेड़-पौधे चमकदार और बहुत ही खूबसूरत थे। फूलों की खुशबू सब तरफ फैली हुई थी। रोहन अचंभित हो गया और खुशी के मारे हंस पड़ा। जब वह चलने लगा, तो उसके सामने एक छोटी सी मगरमच्छ आई

मगरमच्छ ने रोहन को देखते ही बातचीत की और उसे अपने साथ जादुई जंगल का दरबार दिखाने के लिए आमंत्रित किया। रोहन को यह सुनकर बहुत खुशी हुई और वह उसे पीछे चलने लगा।

मगरमच्छ रोहन को जादुई जंगल के राजा के पास ले गई, जहां एक बड़ा समारोह चल रहा था। वहां उन्हें सभी जानवर मिले, जिन्होंने रोहन को अपने जादुई जंगल में स्वागत किया। सभी जानवर बहुत दोस्ताना और खिलौने वाली भाषा में बातचीत कर रहे थे। रोहन को वहां सबसे अधिक पसंद आई, एक चिड़िया थी जो अपने चमकदार पंखों और सुंदर आवाज़ के लिए मशहूर थी।

चिड़िया रोहन के पास उड़ी और उसे कुछ बहुत खास दिखाने लगी। वह एक जादुई गाना गा रही थी, जिसने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। उसकी आवाज़ मधुर और मनमोहक थी, जो सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया। जब उसने अपना गाना पूरा किया, तो सभी जानवर रोहन के चाहने लगे और उसे अपने दोस्त मानने लगे।

एक परी की कहानी

एक समय की बात है, जब दुनिया में परियों का राज्य था। सभी लोग खुश थे और समृद्धि का आनंद ले रहे थे। इस राज्य में एक बहुत ही सुंदर और बुद्धिमान परी रहती थी जिसका नाम था मोहिनी। वह अपनी खूबसूरती और बुद्धिमत्ता के कारण सबसे प्रिय थी।

एक दिन, परी-मोहिनी ने देखा कि राज्य में बहुत सी असमंजस और समस्याएं हो रही हैं। लोग एक दूसरे से लड़ रहे थे और अफसोस की बात है कि इससे यह राज्य बिगड़ता जा रहा था। मोहिनी को दुख हुआ और उसने अपने प्रभु इंद्र से अनुरोध किया कि उन्हें इस समस्या का समाधान देने की कृपा करें।

इंद्र ने परी-मोहिनी को बहुत सोच-विचार करने के बाद बताया कि इस समस्या का समाधान सिर्फ एक विद्वान व्यक्ति ही कर सकता है जो अनुभवी और बुद्धिमान हो। मोहिनी ने अपनी बुद्धिमानी का परिचय देते हुए कहा कि वह उस व्यक्ति का पता लगाकर उससे मदद मांगेगी।

फिर परी-मोहिनी ने पृथ्वी पर अपनी यात्रा शुरू की जहां उसने एक युवा लड़के को देखा जो बहुत ही बुद्धिमान था। मोहिनी ने उससे बात की और उसे राज्य की समस्याओं के बारे में बताया। लड़के ने सुना और उसे समाधान भी बताया। मोहिनी ने उसे राज्य में ले जाने का अनुरोध किया और लड़के ने इसे मान लिया।

इस लड़के के समाधान ने राज्य को नए आयाम दिए। सभी लोग उसे धन्यवाद देने लगे और मोहिनी ने अपनी खुशी का व्यक्त किया। उसने उस लड़के का साथ नहीं छोड़ा और उसे बहुत से अनुभव और ज्ञान दिए। वह लड़का बड़ा हो गया और उसने भी अपनी खुद की परीमाण से राज्य की समस्याओं का समाधान किया।

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